जाओ, तुम्हे माफ कर दिया है,
तुम क्या इतनी भी खराब नही.
मगर तुम्हारे बिना जीना मतलब
शाम तो हैं मगर शराब नही.

दो प्याले भर के रखे हैं,
अब तीसरा भरना बाकी हैं…
दिल तो रंजिश भरा मैकदा है,
और दर्दभरे आंसू हमारे साकी हैं.

पागल सी कोई रात हैं ये,
बादलोंका साया हैं…
बरसों तक दिल मे समेटा अंधेरा,
आज फिरसे मिलने आया हैं.

धुंदलीसी सुनाई देती हैं कही
आहट तुम्हारे कदमोंकी,
सुरखे होंठ चाहते हैं कबसे
बरसात सुरीलें नगमोंकी…

लिखनेमे मायुसी आ गयी हैं,
फिर भी कलम आगे बढता हैं,
दिल के हजार टुकडे होनेसेभी,
उसे कोई फरक ही नही पडता हैं.

सडके अंजानसी तुम्हारे मोहोल्लेकी
मगर तुम्हारा पता हम भुलाते नही.
तुम तो खूब याद आती हो हमे,
क्या हम तुम्हे याद आते नही?

लो आज ठुकरायी सब यादें
दिल के पन्नोंको साफ कर दिया हैं.
बस खुश रहो, सलामत रहो…
जाओ, तुम्हे माफ कर दिया हैं.

Soham Bhallal
Non – Rotaractor

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